क्लब फुट-जानें इस परिस्थिति के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें

April 27, 2022by admin
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जानें क्लब फुट के लक्षण, कारण, इलाज आदि बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें

बच्चे के जन्म के समय विभिन्न तरह की समस्याएं हो सकती हैं। आज मेवाड़ हॉस्पिटल की टीम बात करने जा रही है ऐसी ही स्थिति के बारे में जिसे क्लब फुट के नाम से जाना जाता है। यह पैरों से संबंधित एक ऐसी विकृति है जिसमें बच्चे के पैर का आकार असामान्य होता है। यह विकृति आमतौर पर जन्म से ही उपस्थित रहती है। बच्चे की पैदाइश के समय पैरों में टेढ़ापन दिखना यकीनन हमें विचलित कर सकता है। लेकिन हां, अधिकतर मौकों में डॉक्टर की मदद से इस स्थिति को सुधारा जा सकता है। आइए इस ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं क्लब फुट से जुड़ी विभिन्न बातों को और आखिर क्यों ये आपके और आपके बच्चे के लिए एक गंभीर समस्या बन सकती है।

क्लब फुट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

1. इस अवस्था में बच्चों के पैर अंदर या बाहर की ओर मुड़े होते हैं जिस वजह से उन्हें चलने-फिरने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
2. ऐसा आमतौर पर तब होता है जब टेंडन्स, जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने का काम करते हैं, सामान्य से छोटे होते हैं।
3. इसमें एक या दोनों पैरों में यह समस्या हो सकती है। इससे प्रभावित होने वाले लगभग आधे बच्चों के दोनों पैरों में दिक्कत पाई जाती है।
4. यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है जिस वजह से सर्जरी का उपयोग करना पड़ सकता है।
5. लड़कियों की तुलना में लड़कों को इस तरह की परेशानी होने का खतरा ज़्यादा रहता है।
6. हालांकि क्लब फुट एक चिंताजनक विषय है, लेकिन आमतौर पर बच्चों को दर्द या असहजता का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन हां, भविष्य में इससे जुड़ा दर्द उन्हें प्रभावित कर सकता है।

क्या हैं क्लब फुट के लक्षण?

बच्चों में क्लब फुट के लक्षण कई प्रकार के हो सकते हैं। आइए जानते हैं आप किस प्रकार इसकी पहचान कर सकते हैं।

1. पैर का ऊपरी हिस्सा अंदर या नीचे की ओर झुका रहना। इसके फलस्वरूप एड़ी का अंदर की ओर मुड़ जाना।
2. जिस पैर में क्लब फुट की उपस्थिति रहती है वो पैर दूसरे पैर की तुलना में छोटा हो सकता है।
3. इस अवस्था में प्रभावित पैर में पिंडली की मांसपेशियां अविकसित या थोड़ी छोटी रह सकती हैं।.
4. प्रभावित पैर की एड़ी भी सामान्य से छोटी हो सकती है।
5. यदि पैर अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं, तो यह भी क्लब फुट के लक्षण में से एक हो सकता है।
6. इस स्थिति में चलते समय बच्चे लड़खड़ा भी जाते हैं।
7. क्लब फुट के कारण टखनों में जकड़न जैसी समस्या भी हो सकती है।

क्लब फुट के प्रकार

क्लब फुट के तीन प्रकार हैं:- इडियोपेथिक क्लबफुट (Idiopathic Clubfoot), न्यूरोजेनिक क्लबफुट (Neurogenic Clubfoot), और सिंड्रोमिक क्लबफुट (Syndromic Clubfoot)

1. इडियोपेथिक क्लब फुट:- ये मुख्य रूप से होने वाला क्लब फुट है जो बच्चे की पैदाइश से ही उपस्थित रहता है। इस स्थिति में आधे से ज़्यादा बच्चों के एक पैर में ही इस तरह की परेशानी देखने को मिलती है। इसके होने का कोई प्रमुख कारण नहीं होता। यदि बच्चों को यह समस्या हो तो उनके पैर में सख्ती होती है और उन्हें घुमाने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

2. न्यूरोजेनिक क्लब फुट:- ये नसों से संबंधित परिस्थति के कारण होता है। रीढ़ की हड्डी में दबाव या सेलिब्रल पालसी के कारण भी क्लब फुट की समस्या बचपन में कुछ समय बाद हो सकती है।

3. सिंड्रोमिक क्लब फुट:- यह प्रकार कुछ क्लीनिकल अवस्थाओं के साथ पाया जाता है जो किसी सिंड्रोम से मेल रखती है। क्लब फुट का यह प्रकार इतना आम नहीं है, लेकिन अगर ये हो जाता है तो इसका उपचार करना मुश्किल साबित होता है। इससे जुड़ी और जानकारी के लिए आप मेवाड़ हॉस्पिटल के डॉक्टर्स से संपर्क कर सकते हैं।

क्या हैं क्लब फुट के कारण?

वैसे तो क्लब फुट के कारण अज्ञात हैं, लेकिन फिर भी कई ऐसी बातें हैं जिसके कारण यह परेशानी देखने को मिलती है। आइए बात करते हैं उनमें से कुछ परिस्थतियों के बारे में।

1. यदि परिवार के अन्य नज़दीकी सदस्यों को भी इस तरह की दिक्कत है, तो मुमकिन है कि ये बच्चे में भी पाई जाए। इसी के साथ-साथ यदि किसी दंपत्ति की संतान के साथ यह स्थिति पैदाइश के समय पाई गई है, तो उनके अगले बच्चे को भी क्लब फुट होने का खतरा है।
2. कभी-कभी हड्डी-संबंधी असामान्यता के कारण भी यह परेशानी हो सकती है। जैसे कि स्पाइना बिफिडा(spina bifida), हिप डिस्प्लास्या (hip dysplasia), आदि।
3. ऐसा कहा जाता है कि न्यूरोमस्क्यूलर (neuromuscular) मार्ग में समस्या होने पर भी यह परेशानी हो सकती है। ये दिमाग, रीढ़ की हड्डी, मांसपेशी या फिर नस में हो सकती है।
4. इसके अलावा जो औरतें गर्भावस्था के दौरान धुम्रपान करती हैं या उन्हें डायबिटीज़ की समस्या होती है, तो ये भी क्लब फुट के कारण में से एक बन सकती है। कुछ प्रकार के ड्रग्स या शराब के सेवन से भी इस समस्या के उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है।

किस डॉक्टर से संपर्क किया जाए?

पैरों के स्वास्थ्य का सही रहना एक सुखद जीवन के लिए बेहद ज़रूरी है। यदि बचपन में ही इससे जुड़ी कोई समस्या हो जाए, तो बड़ों को चाहिए कि जल्द ही डॉक्टर से सलाह लें। क्लब फुट के इलाज के लिए आप पीडाएट्रिक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर (pediatric orthopedic doctor) से सलाह ले सकते हैं। आपको बताते चलें कि मेवाड़ हॉस्पिटल में अनुभवी और कुशल डॉक्टर्स की टीम है जो ऐसे मौकों पर पूर्ण रूप से आपकी सहायता करेगी। इस हॉस्पिटल में विख्यात पीडाएट्रिक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर की मौजूदगी भी है जिनके सालों के अनुभव और सटीक उपचार विकल्प के माध्यम से आप अपने बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। पीडाएट्रिक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर खासतौर से छोटे बच्चों के मस्क्यूलोस्केलेटल (musculoskeletal) संबंधी परेशानियों के समाधान के लिए होते हैं। वे किसी भी अन्य डॉक्टर से बेहतर उस अवस्था को समझ सकते हैं कि बच्चे को किस तरह की परेशानी हो रही है। इनके अलावा आप ऑर्थोपेडिक सर्जन या फिर फिजिकल थैरेपिस्ट से भी बात कर सकते हैं।

क्लब फुट से जुड़े इलाज विकल्प

गर्भावस्था के 20वें हफ्ते तक अल्ट्रासाउण्ड के माध्यम से इसका पता लग सकता है। अल्ट्रासाउण्ड एक इमेजिंग तकनीक है जिससे गर्भाशय में बच्चे को देखा जाता है ताकि उसके विकास के बारे में पता लग सके। लेकिन हां, ये बात भी याद रखने लायक है कि अगर इसका पता गर्भाशय में लग भी जाता है तो भी इसका उपचार मुमकिन नहीं है जब तक कि बच्चे की पैदाइश ना हो जाए। यदि ऐसा नहीं होता, तो फिर बच्चे की पैदाइश के समय ही इसकी उपस्थिति मालूम होती है। कुछ मौकों पर एक्स-रे के माध्यम से भी क्लब फुट के होने का पता लगाया जा सकता है।

इस बात पर ध्यान देने की ज़रूरत है कि यदि बच्चे को क्लब फुट बताया जा चुका है तो उसे इलाज की ज़रूरत पड़ेगी, क्योंकि बिना इलाज के यह स्थिति खुद-बखुद सही नहीं हो सकती। इलाज का उद्देश्य पैरों की पॉजिशन को सुधारने पर केंद्रित रहता है ताकि पैरों की मांसपेशियां, टेंडन्स, और हड्डी का विकास सही तरह हो सके। यदि जन्म के समय क्लब फुट का पता चल चुका है, तो अब बेहतर यही है कि बच्चे के जन्म के एक महीने के भीतर इलाज शुरू हो जाए क्योंकि इस समय उनके पैरों और एड़ियांे का विकास शुरूआती लेवल पर होता है।

आइए अब बात करते है क्लब फुट के इलाज की।

1. पोंसेटी मेथड (Ponseti Method)
यह क्लब फुट के मौके पर उपयोग होने वाला बेहतरीन उपचार स्त्रोत है। कई मौके ऐसे होते हैं जहां सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती। सिर्फ कास्ट और ब्रेस के माध्यम से पैरों की पॉजिशन को ठीक किया जाता है। जब फ्रेक्चर होने पर पट्टा बंधता है, जिसे कई लोग प्लास्टर भी कहते हैं, वो कास्टिंग कहलाती है। इसमें सबसे पहले डॉक्टर पैरों को स्ट्रेच और पॉजिशन करता है, उसके बाद पैरों के प्रभावित हिस्से समेत एड़ियों को कास्ट करता है जिसके माध्यम से पैर अपनी नई जगह पर जमा रह सके। ये कास्ट एक हफ्ते में हट जाता है और उसके बाद वापस से पैरों को पॉजिशन किया जाता है। दूसरी कास्टिंग पैर को नई जगह पर जमाए रखने में मदद करती है। यह प्रोसेस लगभग 7-8 बार चल सकता है जब तक कि पैर की पॉजिशन सही ना हो जाए। जितना जल्दी जन्म के बाद यह इलाज कर लिया जाए, उतने ही बेहतर इसके परिणाम निकलने की संभावना होती है।
अब बात करें ब्रेसिंग की, यह क्लब फुट के इलाज के लिए ज़रूरी है। इसकी अनुपस्थिति में क्लब फुट की समस्या दोबारा हो सकती है। यह पैरों में पहनने का एक उपकरण है जिसे कास्टिंग के बाद लगभग 23 घंटों तक प्रतिदिन दो महीने तक पहनना पड़ सकता है। बाद में डॉक्टर की सलाह से इसे कुछ वर्षों तक सिर्फ रात में पहनने की ज़रूरत पड़ती है। यह पैर को उस जगह पर घूमने से रोकता है जहां पर वो कास्टिंग के पहले था। इसके अलावा बच्चे को कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ की ज़रूरत पड़ सकती है।

2. सर्जरी
जब क्लब फुट ज़्यादा गंभीर स्थिति में होता है, तो ऐसे मौकों पर सर्जरी ही बेहतर विकल्प माना जाता है। सर्जरी के माध्यम से टेंडन्स, लिगामेन्ट्स, हड्डियों और जोड़ों को उनकी सही जगह पर किया जाता है। सर्जरी के बाद बच्चे को कुछ महीनों तक कास्ट पहनाया जाता है और कास्टिंग के बाद ब्रेसिंग की सलाह भी दी जा सकती है।

एक सकारात्मक संदेश
यदि आपका बच्चा क्लब फुट से ग्रस्त है, तो घबराएं नहीं, उसका समय पर इलाज कराएं। क्लब फुट के इलाज को यदि सटीक तरीके से किया जाए, तो बच्चे का पैर आम पैरों की तरह ही दिखेगा। वो अन्य बच्चों की तरह कई सारी गतिविधियों में हिस्सा ले सकता है और दिनचर्या में होने वाले कई कामों को अंजाम दे सकता है। बहुत कम ही ऐसे मौके होते है जहां क्लब फुट के इलाज के बाद भी स्थिति सही तरह से नहीं सुधर पाती।

कुछ अन्य ज़रूरी बातें

1. क्लब फुट को पूर्ण रूप से सही होने में कुछ वर्षों का समय लग सकता है। हमारे पीडाएट्रिक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर की सलाह और मदद से आपका बच्चा आराम से चल, दौड़, और खेल भी सकता है।

2. गर्भावस्था के समय औरतों को ध्यान देने की ज़रूरत है। खासतौर से वे जिन्हें धुम्रपान, शराब के सेवन या फिर किसी ऐसे पदार्थ लेने की आदत है जिनके बारे में डॉक्टर मना करते हैं। इस प्रकार की लापरवाही के कारण बच्चे में जन्म दोष पाए जा सकते हैं।

3. यदि बच्चे के पैरों में समस्या दिखाई दे रही है, तो कृपया डॉक्टर को दिखाने में देर ना करें। ऊपर दी गई जानकारी के माध्यम से आप क्लब फुट के बारे में काफी कुछ समझ चुके होंगे। इस अवस्था को अनुपचारित छोड़ना आपके और आपके बच्चे के लिए दुखदायी साबित हो सकता है।

4. कुछ मौके ऐसे भी हो सकते हैं जहां क्लब फुट के इलाज में लापरवाही के कारण बच्चे को अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर उसे आर्थराइटिस की समस्या हो सकती है। जो लोग आर्थराइटिस से परिचित नहीं हैं, ये हमारे जोड़ों से जुड़ी बड़ी ही चिंताजनक स्थिति है जिसका पूर्ण रूप से इलाज होना संभव नहीं है।

5. इसके अलावा यदि बच्चे का पूरा शरीर सही पॉस्चर में है और उसके पैरों में दिक्कत है, तो इस कारण उसके पूरे शरीर पर प्रभाव पड़ेगा। साथ ही एड़ी में घुमाव के कारण चलने-फिरने में भी परेशानी हो सकती है।
इसलिए हमारा बार-बार आपसे यही अनुरोध है कि अपने बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही ना करें। आपकी एक गलती से बच्चे के जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है और इसी कारण आपको भी कठिनाई झेलनी पड़ सकती है। मेवाड़ हॉस्पिटल की टीम आपके साथ है ऐसे बेहतरीन और काबिल डॉक्टर्स के साथ जो इन परिस्थतियों में अपना योगदान देकर बच्चे की शारीरिक अवस्था को सुधारने की कोशिश करेगी।

मेवाड़ हॉस्पिटल की टीम से सहायता प्राप्त करें

यदि आप क्लब फुट से जुड़ी और किसी जानकारी के बारे में परिचित होना चाहते हैं, तो आप हमारे डॉक्टर्स से अपॉइन्टमेन्ट हासिल करके बात कर सकते हैं। इसी के साथ हमारे सेन्टर्स या मेडिकल सुविधाओं से जुड़ी किसी भी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे हैल्पलाइन नंबर्स पर संपर्क कर सकते हैं। चाहें तो ऑनलाइन चैट सपोर्ट या फिर मेल के उपयोग से भी आप हमसे जुड़ सकते हैं।
स्वस्थ रहें और अपने बच्चों के स्वास्थ्य का भी बचपन ही से ध्यान रखें।

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