सर्दियों के मौसम में हड्डियों और जोड़ों में दर्द

October 21, 2021by admin
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सर्दियों के मौसम में हड्डियों और जोड़ों में दर्द के कारण व इलाज

प्रकृति में विभिन्न तरह के मौसम मौजूद हैं जो हमें साल भर देखने को मिलते हैं। उन्हीं में से एक सर्दी का मौसम है जो हममें से कई लोगों का पसंदीदा मौसम है। और क्यों ना हो, ठिठुरते वातावरण का एक अलग ही मज़ा है। लेकिन ज़रूरी नहीं कि इस बात से सभी सहमत हो। क्योंकि कई लोगों को सर्दी के मौसम में हड्डियों और जोड़ों में दर्द की समस्या उत्पन्न होने लगती है। क्या आप भी जानना चाहते हैं कि ऐसा क्यों होता है? मेवाड़ हॉस्पिटल की टीम आज आपको इस तथ्य से परिचित कराने की कोशिश करेगी और उन कारणों के बारे में बताएगी जिस वजह से यह समस्या होने लगती है।

हड्डियों और जोड़ों में दर्द

जोड़ों में दर्द किसी चोट या फिर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का संकेत हो सकता है। खासतौर से सर्दियों के मौसम में घुटने, कूल्हे, तथा टखने के जोड़ों में तकलीफ हो सकती है। एक अध्ययन के मुताबिक यह पता चला है की जो लोग आर्थराइटिस (arthritis) से पीड़ित हैं, उन्हें हर 10 डिग्री तापमान की गिरावट पर जोड़ों में दर्द और तकलीफ हो सकती है। हालांकि स्पष्ट रूप से सर्दी के मौसम और जोड़ों में दर्द के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है। कुछ अध्ययन यह भी कहते हैं कि तापमान के अलावा बैरोमेट्रिक प्रेशर (barometric pressure) भी मौसम-संबंधी जोड़ों में दर्द का एक कारण हो सकता है। आइए जानते हैं बैरोमेट्रिक प्रेशर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें।

बैरोमेट्रिक प्रेशर

इसे वायुमंडलीय दबाव (atmospheric pressure) के नाम से भी जाना जाता है। यह धरती पर मौजूद वो प्रेशर है जो कि हमारे ऊपर मौजूद हवा के वज़न के कारण उत्पन्न होता है। हमारे वायुमंडल में जो हवा है उसका भी अपना एक भार है। इस तरीके का प्रेशर समय पर बदलता रहता है। बैरोमेट्रिक प्रेशर में बदलाव मौसम के बदलने पर देखने को मिलता है। कुछ विशेषज्ञ बताते हैं कि जब बैरोमेट्रिक प्रेशर गिरता है तो इससे मांसपेशियों, टेंडन्स और करीबी टिशू में बदलाव होने लगता है। यानी कि वह बढ़ने लगते हैं या फिर उनमें सूजन आ जाती है। ऐसा होने पर जोड़ों पर प्रेशर आ जाता है।

वहीं दूसरी ओर अगर कुछ विशेषज्ञों की राय देखें तो उनका मानना यह है कि जोड़ों में दर्द और मौसम में बदलाव का आपस में कोई कनेक्शन नहीं है। हालांकि यह बात सच है की दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिन्हें सर्दी के मौसम में हड्डियों और जोड़ों में दर्द सहना पड़ता है। हां यह बात भी गौर करने लायक है हर इंसान का शरीर एक दूसरे से अलग होता है। कुछ लोगों का शरीर मौसम के बदलने पर संवेदनशील हो सकता है।

सर्दी के मौसम में हड्डियों और जोड़ों में दर्द के कुछ अन्य कारण

1. मौसम सर्द होने पर मांसपेशियों (muscles) में कठोरता आ सकती है। तापमान में गिरावट की वजह से मांसपेशियां कठोर हो सकती हैं। इस कठोरता के कारण मांसपेशियों को घूमने में दिक्कत होती है जिस वजह से दर्द की शिकायत आ सकती है।

2. हमारे जोड़ों में एक द्रव मौजूद होता है जिसका नाम सिनोवियल द्रव (synovial fluid) होता है। जब हमारे जोड़ दिनचर्या के काम करते हैं तो यह द्रव उन्हें सही तरीके से काम करने की योग्यता प्रदान करता है। सर्दी के मौसम में यह द्रव गाढ़ा हो सकता है जिस वजह से जोड़ों में कठोरता आ सकती है। और इतना ही नहीं, इस वजह से जोड़ों को हिलाने के समय दर्द का भी सामना करना पड़ सकता है।

3. हड्डियों और जोड़ों में दर्द का कारण सर्दी के मौसम में बाहर ज़्यादा ना निकलने की वजह से भी हो सकता है। जी हां, कई लोग सर्दी के मौसम में घर पर रहना पसंद करते हैं। इस जीवनशैली की वजह से वह ज़्यादा चल फिर नहीं पाते। खासतौर से वे लोग जो अर्थराइटिस या फिर किसी जोड़-संबंधी परेशानी से ग्रस्त हैं, उन्हें इस तरह की गतिविधि से जोड़ों में दर्द हो सकता है।

4. आइए अब एक और अध्ययन से परिचित होते हैं जिसमें यह बताया गया है कि सर्दी के मौसम में हमारा शरीर अधिक गर्मी बचाने का प्रयास करता है। उस समय हमारे मुख्य अंगों, जैसे कि-दिल, फेफड़े और पाचन अंगों में रक्त ज़्यादा भेजा जाता है। ऐसा होने पर कंधे, बाजू, घुटनों और पैरों के जोड़ों को खून का बहाव कम मिलता है। इस तरह की परिस्थिति में इन प्रमुख जोड़ों की रक्त वाहिकाएं (blood vessels) दब जाती हैं। रक्त का बहाव कम होने के फलस्वरूप ये प्रमुख जगह कठोर और ठंडी हो जाती है और यह हड्डियों और जोड़ों में दर्द का कारण बन सकती हैं।

5. कभी-कभी ठंड के मौसम की वजह से इंसान के मूड पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है। ये दर्द को सहन करने की ताकत में बाधा डाल सकता है। इसलिए कोशिश करें कि आप अपने आप को खुश और अपपने दिमाग को शांत रखें। इंसान के मूड में सुधार होने पर जोड़ों में दर्द को सहने में मदद मिल सकती है।

वे जोड़ जो सर्दी के मौसम में ज्यादा प्रभावित होते हैं

हालांकि सर्दी के मौसम में जोड़ों में दर्द शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है, लेकिन आमतौर पर यह देखा गया है की वज़न ढोने वाले जोड़ ज़्यादातर प्रभावित होते हैं। जैसे कि टखने, घुटने और कूल्हे। खासतौर से बात की जाए घुटनों की, कई लोगों को इस जोड़ में ज़्यादातर तकलीफ होती है। अगर किसी व्यक्ति को घुटनों से संबंधित कोई चोट लगी हो, जैसे कि घुटना-संबंधी ट्रोमा, पेटेलर टेंडिनाइटिस (patellar tendinitis) या रनर्स नी (runner’s knee), ऐसी परिस्थितियां सर्दी के मौसम में दर्द को बढ़ावा दे सकती हैं।

हड्डियों और जोड़ों में दर्द के कारण

1. ओस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis)

ये आर्थराइटिस के सबसे प्रमुख और सामान्य प्रकारों में से एक है जिससे दुनिया भर में लाखों लोग पीड़ित हैं। ऐसी परिस्थिति तब उत्पन्न होती है जबकि जोड़ों में उपस्थित कार्टिलेज समय के साथ कमज़ोर हो जाता है।

2. बर्साइटिस (Bursitis)

यह एक ऐसी दर्द भरी परिस्थिति है जिसमें चिकनाई तरल-युक्त पदार्थ से भरा पाउच, जिसे बर्सा कहा जाता है, उसमें जलन उत्पन्न हो जाती है। बर्सा हमारे मांसपेशियों, हड्डियों और टेंडन्स जैसे अंगों को कुशन प्रदान करता है।

3. टेंडिनाइटिस (Tendinitis)

टेंडन्स वे टिशू होते हैं जो हमारी मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं। टेंडन में जलन होने को टेंडिनाइटिस कहा जाता है। बर्साइटिस की तरह यह भी दर्द भरी स्थिति होती है जो कि खासतौर से घुटने, कूल्हे, कोहनी, कंधे, आदि में हो सकती है।

4. ओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)

यह एक हड्डी-संबंधी बीमारी है जिसमें हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं। इतनी कमज़ोर कि फ्रैक्चर होने की संभावना अधिक हो जाती है। इस परिस्थिति में इंसान को अपनी हड्डियों की ताकत से समझौता करना पड़ता है।

5. रिकेट्स (Rickets)

यह बीमारी बच्चों से संबंधित है। इस स्थिति में बच्चों की हड्डियों का विकास पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है जिस वजह से हड्डियां कमजोर और मुलायम हो जाती है। रिकेट्स होने का एक प्रमुख कारण शरीर में विटामिन डी की कमी है।

6. गाउट (Gout)

यह भी आर्थराइटिस के प्रमुख कारणों में से एक है जो कि विभिन्न आयु वर्गो के लोगों को प्रभावित करती है। अगर कोई व्यक्ति गाउट से पीड़ित है तो उसे एक या उससे ज्यादा जोड़ों में दर्द और सूजन का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इसका असर कलाई, कोहनी, घुटनों, टखनों, हाथ और पैरों में देखने को मिल सकता है, लेकिन ज़्यादातर यह अंगूठे को प्रभावित करता है।

7. मोटापा (Obesity)

हड्डियों और जोड़ों में दर्द का कारण शरीर का ज़्यादा वजन भी हो सकता है। इससे व्यक्ति के भार उठाने वाले जोड़ों में ज़्यादा तनाव हो सकता है। जैसे कि पीठ, पैर और घुटने। इसके साथ ही ज़्यादा वजन वाले व्यक्ति के जोड़ों में सूजन और जलन की वजह से दर्द और गति -संबंधी परेशानी हो सकती है।

8. रूमेटाइड अर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis)

अर्थराइटिस का यह प्रकार भी हमारे जोड़ों के लिए दुखदाई साबित हो सकता है। यह एक ऐसी परिस्थिति है जिसमें जोड़ों के अलावा हमारे शरीर के कुछ अन्य प्रमुख अंग भी प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन खासतौर से बात की जाए जोड़ों की, तो इससे दर्द, सूजन और कठोरता का सामना करना पड़ सकता है।

9. मोच (Sprain)

स्प्रेन एक ऐसी अवस्था है जिसमें जोड़ के भीतर लिगामेंट खींच या फट जाता है। स्प्रेन में व्यक्ति के एक या एक से ज़्यादा लिगामेंट को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में दर्द उत्पन्न होता है और यह स्थिति आमतौर पर घुटनों, टखनों और कलाई में पाई जाती है।

10. फ्रैक्चर या अव्यवस्था (Fracture Or Dislocation)

हड्डी का टूटना या उसके असल जगह से खिसकने पर दर्द होना सामान्य बात है। दोनों ही परिस्थितियों में समय पर परामर्श लेना ज़रूरी हो जाता है।

अगर आप भी जोड़-संबंधी परेशानी से जूझ रहे हैं और हड्डियों और जोड़ों में दर्द का इलाज पाना चाहते हैं, तो कृपया मेवाड़ हॉस्पिटल के श्रेष्ठ ऑर्थोपेडिक डॉक्टर्स से परामर्श हासिल करें। ऐसी परिस्थितियों में वे आपको उचित सलाह प्रदान करने की कोशिश करेंगे।

हड्डियों और जोड़ों में दर्द का इलाज

जब तापमान में गिरावट होने लग जाए, तो अपने जोड़ों को दर्द से दूर रखने के कुछ उपाय इस प्रकार हैं-

1. अपने आप को शारीरिक रूप से एक्टिव रखें

सर्दियों के मौसम में हममें से कई लोगों को अपने बेड या सोफा पर दिनभर गरम रज़ाई के साथ बैठने में मज़ा आता है। लेकिन याद रहे आपको सर्दी से बचने के साथ-साथ अपने शरीर को एक्टिव रखना भी ज़रूरी है। उसके लिए आप कुछ गतिविधियों को शामिल कर सकते हैं जिससे कि आपका स्वास्थ्य बेहतर हो। उदाहरण के तौर पर चाहें तो गर्म पानी वाले स्विमिंग पूल में कुछ समय बिता सकते हैं। अगर यह मुमकिन ना तो आप विभिन्न तरह के व्यायाम कर सकते हैं। इसके अलावा अपने आप को चुस्त और स्वस्थ रखने के लिए आप तेज़ी से चलने की कोशिश करें जिसे अंग्रेज़ी में Brisk Walking कहा जाता है।

अगर आप बाहर जाना पसंद नहीं करते हैं तो कम से कम घर के अंदर ही आधे घंटे के लिए कार्डियो, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, या फ्लैक्सिबिलिटी से जुड़ी कुछ एक्सरसाइज़ कर लें। लेकिन हां, याद रहे कि इन सब गतिविधियों को करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। आप चाहें तो मेवाड़ हॉस्पिटल के अनुभवी और कुशल डॉक्टर्स से मिल सकते हैं। वे आपको कुछ ऐसी एक्सरसाइज से परिचित करा सकते हैं जो कि जोड़ों और हड्डियों में दर्द के इलाज में सहायक हो सकती हैं।

2. अपने शरीर के वजन को मेंटेन करें

जैसे-जैसे सर्दी बढ़ने लगती है वैसे ही खाने का मजा बढ़ जाता है। और हमें कई सारे व्यंजन खाने की इच्छाएं उमड़ने लगती है। कई लोग सर्दी के मौसम में शरीर का वजन बढ़ने का अनुमान लगाते हैं। लेकिन याद रहे कि अगर आप लगातार अपने वज़न को बढ़ने देंगे, तो इससे आपके जोड़ों पर प्रभाव पडे़गा। खासतौर से घुटनों पर। इसलिए कोशिश करें कि आप एक बैलेंस्ड वज़न बनाए रखें और अपने आप को विभिन्न तरह की शारीरिक गतिविधियों से फिट रखें।

3. शराब के सेवन से बचें

कई लोगों को यह लगता है कि शराब-संबंधी चीजों का सेवन करने से उनके शरीर को गर्माहट मिलेगी। लेकिन एक बात याद रखें की किसी भी मौसम में शराब पीना हमारे शरीर और जान के लिए हानिकारक है। अगर कोई व्यक्ति शराब पीता है तो उसकी रक्त वाहिकाएं (blood vessels) चैड़ी हो जाती हंै जिसकी वजह से हीट लॉस (heat loss) होता है। इसलिए शराब की जगह कोशिश करें कि आप सेहत को फायदा पहुंचाने वाली चीजों का सेवन करें। जैसे कि हर्बल टी या गर्म दूध जिसमें एक चम्मच हल्दी भी मिल जाए। खासतौर से हल्दी वाला दूध पीने से आर्थराइटिस वाले दर्द में आराम मिल सकता है।

4. घर में भी अपने आप को गर्म रखें

जिस तरीके से आप घर के बाहर अपने आप को सर्दी के मौसम में ओढ़-पहन कर निकलते हैं, उसी तरीके से आपको घर के अंदर भी सावधानी पूर्वक रहने की कोशिश करनी है। उन तरीकों को अपनाएं जिनके बलबूते आप घर में भी गर्म और आरामदायक स्थिति में बने रहें। यह आपको सर्दी के मौसम में एक बेहतर एहसास देगा। आपके मन को शांत रखेगा और दिनचर्या में होने वाले कामों में आसानी प्रदान करेगा।

5. सर्दी में भी पानी पीना ना भूलें

गर्मी हमें समय पर पानी पीना याद दिलाती है, लेकिन सर्दी के मौसम में हममें से कई लोग इस बात को भूल जाते हैं कि हमारे लिए साल में हर दिन एक तय मात्रा में पानी पीना ज़रूरी है। याद रखें, भले ही किसी भी तरह का मौसम क्यों ना हो, हमें अपने शरीर को हाइड्रेटेड रखना है। हमारे शरीर के लिए पानी एक बहुत बड़ी ज़रूरत है। इसलिए कोशिश करें कि जितना मुमकिन हो आप सर्दी में भी पानी पीना जारी रखें। और अगर आप ऐसा करने में असमर्थ हैं तो दिन भर के अंतराल में गर्म चाय या कोई और स्वास्थ्य- संबंधी स्त्रोत को आप अपना सकते हैं। अगर बेहतर हो तो आप हैल्दी सूप को भी प्राथमिकता दे सकते हैं। ना सिर्फ यह आपके मुंह के स्वाद को बदलेगा बल्कि हाइड्रेशन में भी मदद करेगा। और अगर आप आज से यह निश्चय कर चुके है कि आप अपने शरीर के अनुकूल तय मात्रा में प्रतिदिन पानी पिएंगे, तो कम से कम छह से आठ गिलास प्रतिदिन पानी पीने का टारगेट सेट कर लें।

6. अपने खानपान पर जरूर ध्यान दें

पानी के अलावा हमारे शरीर के लिए दूसरी ज़रूरी चीज है भोजन। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि आप हर समय जंक फूड या फिर स्वास्थ्य के विपरीत भोजन को प्राथमिकता दें। मेवाड़ हॉस्पिटल की टीम आपको स्वास्थ्य के अनुकूल डाइट लेने की सलाह देती है। वैसे तो इस तरह की गतिविधि साल भर होना ज़रूरी है, लेकिन सर्दी के मौसम में खास तौर से ध्यान रखें। एक बैलेंस्ड और स्वस्थ डाइट के माध्यम से आपका शरीर एक्टिव रहेगा और आपके शरीर को वो पोषण मिलेंगे जो कि हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी हैं। कोशिश करें कि आप फल, सब्जियों, साबुत अनाज और मांस आदि का सेवन करें। हैल्दी डाइट लेते समय प्रोसेस्ड फूड को त्याग दें और ऐसे सामान से भी दूर रहे जिसमें सैचुरेटेड फैट और ज़्यादा शुगर मौजूद हो।

7. विटामिन डी को अपनी जिंदगी में शामिल करें

विटामिन डी हमारे जीवन के लिए बहुत ही ज़रूरी है। यह हमारी एनर्जी और माइंडसेट के लिए आवश्यक है। विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत है सूरज की धूप। और ठंड के मौसम में इस तरह की गतिविधि में अपने आपको ढालना एक अच्छा डिसीजन हो सकता है। विटामिन डी दर्द और कठोरपन को कम करने में भी कारगर है।

मेवाड़ हॉस्पिटल का संदेश

कई लोग सर्दी के मौसम में अपने जोड़ों के स्वास्थ्य में कुछ परेशानी महसूस करतेे हैं। हमने आपको कई ऐसी बातों से परिचित करा दिया है जिसके माध्यम से आप ऐसी परिस्थितियों में अपने जोड़ों का ध्यान रख सकते हैं। फिर भी अगर आप किसी तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं, तो कृपया हमारे डॉक्टर्स से ज़रूर मिलें। वे आपको हड्डियों और जोड़ों में दर्द का इलाज बताएंगे। इसके अलावा भी अगर आपको हमारे हॉस्पिटल के सेंटर और उनकी सुविधाओं के बारे में कोई अन्य जानकारी प्राप्त करनी है, तो आप हमारी टीम से दिए गए हैल्पलाइन नंबर्स या ऑनलाइन चैट के द्वारा संपर्क कर सकते हैं।

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